June 29, 2017 7:46 pm

ऐतिहासिक धरोहरों पर खतरा

3कुल्लू जिला की प्राचीन व ऐतिहासिक धरोहरों पर खतरे के बादल मंडराने लगे और कई प्राचीन मंदिर व कोठियां लुप्त होने के कगार पर पहुंच गई हैं.
राजतंत्र के समय से कुल्लू जिला को कई प्राचीन मंदिर व कोठियां ऐतिहासिक धरोहरों के रूप में मिली हैं, परतुं इनकी सही देखभाल न हो पाने के कारण इनकी हालत जर्जर हो गई है, जहां एक ओर कई प्राचीन मंदिर व कोठियां विभागीय लापरवाही से धूल-मिट्टी व जालों का शिकार हो रही हैं, वहीं कइयों में दरारें आ गई हैं.
जिला के बंजार उपमंडल की कोठी जो कि प्रदेश के प्राचीन भवनों में से एक मानी जाती है, में दरारें आने से यह पांच मंजिला कोठी कभी भी ढह सकती है. इसके अलावा कुल्लू घाटी की धरोहर समझी जाने वाली तलेरा, धलेरा, भलाण, हुरचा व खनेरगी इत्यादि कोठियां भी अंतिम सांसे गिन रही हैं. बंजार उपमंडल में स्थित सुप्रसिद्ध चैहणी कोठी जो कि पांच मंजिला है, भी उपेक्षा का शिकार है. इसकी जर्जर हालत देखकर ऐसा आभास होता है कि यह कुछ रोज की मेहमान है. चैहणी कोठी गांव के लोगों के अनुसार यह कोठी पहले नौमंजिला हुआ करती थी, परंतु 1905 के भूकंप में इसकी चार मंजिले गिर गईं तथा पांच ही शेष बचीं. इस कोठी का निर्माण कार्य ढाढीया नामक ठाकुर ने करवाया था.
उस समय इस तरह की ऊंची कोठियां युद्ध में सुरक्षा के लिए बनाई जाती थीं. पुराने समय में बनी इन कोठियों की महता पर्यटन की दृष्टि से काफी बढ़ गई है. कई देशी व विदेशी पर्यटक इनप कोठियों को देखने के लिए आते रहते हैं, परतुं इनकी महता को सरकार नहीं समझ पाई हैं, जिस कारण यहां ये स्थल पर्यटन की दृष्टि से विकसित नहीं हो पाए हैं, वहीं इनकी हालत भी जर्जर हो गई है. प्रदेश सरकार यदि इन ऐतिहासिक धरोहरों की तरफ विशेष ध्यान नहीं देती है तो इतिहास से जुड़े ये अंश लगभग समाप्त हो जाएंगे. इन ऐतिहासिक धरोहरों को संजोए रखने के लिए इन्हें पुरातत्व विभाग के अधीन कर दिया जाना चाहिए अन्यथा हमारी भावी पीढिय़ों को कभी इन ऐतिहासिक धरोहरों के बारे में कोई भी जानकारी नहीं मिल पाएगी.

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