December 11, 2017 6:37 pm

कांग्रेस में शह मात का खेल जारी…अब किसकी बारी

virbhdr sukhuशिमला, विमल शर्मा।
10 जनपथ में हिमाचल कांग्रेस में भूंचाल का मौसोदा लगभग तैयार हो गया हैं। हिमाचल कांग्रेस के प्रभारी जल्द ही 10 जनपथ का आदेश जारी कर सकते हैं।आज दिल्ली में हिमाचल कांग्रेस में दौनो धड़ो के नेता दिल्ली पहुंच गए हैं। कांग्रेस अध्यक्ष सुखविन्द्र सिंह सुख्खू समेत भावी मुख्यमंत्री के दो प्रबल दावेदार माने जा रहे परिवहन मंत्री जीएस बाली व कौल सिंह के अलावा स्टोक्स एक दिन पहले ही दिल्ली पहुंच गए थे। इसके अलावा पूर्व केन्द्रीय मंत्री व राजनीति के चांणक्य कहे जाने वाले पं.सुखराम भी दिल्ली पहुंचे हुए हैं। वही आज दोपहर मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह अपने सभी कार्यक्रम रद्द कर दिल्ली रवाना हो गए हैं।मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह केअचानक इस तरह दिल्ली दौरे को लेकर कयास लगाए जा रहे है की कांग्रेस आलाकमान किसी बड़े फैसला पर मुहर लगा सकती है।बताया जा रहा है कि कांग्रेस आलाकमान का एक बड़े प्रभावशाली धड़े का मानना है कि किसी एक विशेष नेता के लिए पार्टी की कुबानी नहीं दी जा सकती है।चाहे वो कितना भी प्रभावशाली ही क्यो न हो। वो भी ऐसे हालात में जब देश में कांग्रेस भाजपा के सामने खड़े होने के लिए संर्धष कर रही हैं जवकि मौजूदा समय में कांग्रेस शासित राज्य गुने-चुने राज्य में ही रह गए हैं।अगर हिमाचल में कांग्रेस के परिदृय पर नजर दौड़ाई जाए तो साफ है कि अगर इन विधान सभा चुनाव में युवा नेताओं को आगे नही लाया जाता है तो आने वाले समय में प्रदेश में कांग्रेस का जनाधार उस स्थिति में पहुंच जाएगा जैसा कभी भाजपा का हुआ करता था। भले ही कांग्रेस आलाकमान इस साल विधान सभा चुनाव वीरभद्र सिंह के नेतृत्व में लड़ेने की बात कहे लेकिन संगठन में वीरभद्र सिंह के दखल को कम जरुर किया जाएगा। ऐसी स्थिति में राष्ट्रीय कांग्रेस राज्यो में युवा नेताओं को आगे लाना चाहती है। कांग्रेस आलाकमान साल-2019 में होने वाले लोक सभा चुनावों के लिए कांग्रेस में युवा चेहरो की टीम पूरे देश खड़ा करने की तैयारियों में लगी हैं। वहराल जो भी है हिमाचल में इस साल होने वाले विधान सभा चुनाव के लिए कांग्रेस आलाकमान मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह मामले में कड़ा फैसला होने की खबर मिल रही हैं। जिसकी मुख्य वजह यह भी बताई जा रही है की कांगे्रस इन चुनावों में नए युवा चेहरो को आगे लाना चाहती है। यह इसी सूरत में हो सकता है कि प्रदेश कांग्रेस की कमान सुखविन्द्र सिंह सुख्खू के पास ही रहे। अगर आलाकमान मुख्यममंत्री वीरभद्र सिंह की पंसद का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त करती है तो आलाकमान की पकड़ नही रह जाएगी। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के दिल्ली दौरे को लेकर राजनीतिक गलियारो में चर्चा शुरु हो गई कि अगर वीरभद्र सिंह को चुनाव के लिए फ्री-हैड नही मिलता है तो इनके पास दो ही विकल्प बचते है। जिसमें पहला विकल्प तो यह है कि वीरभद्र सिंह अपने पुत्र विक्रमादित्य के लिए कुवानी दे और दूसरा विकल्प यही रह जाता है कि वह वीरभद्र कांग्रेस का गठन कर विधान सभा चुवान में उतरे। इतना जरुर है की इतनी आसानी से मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह मानने के मूड में नजर नहीं आ रहें है और न ही इनके समर्थक वीरभद्र सिंह को मानने देगें। अब देखना है की समुद्र में हिचकोले खा रही कांग्रेस की नैया कैसे पार होती है और इस नाव का नाविक कौन होगा। प्रदेश की जनता के साथ-साथ प्रदेश के मुख्य राजनीतिक दल विशेषकर भाजपा की निगाहे भी कांग्रेस के रुख पर टिकी हुई हैं। वही सता में बैठे उम्रदराज नेता इतनी आसानी से कुर्सी नहीं छोडऩा चाहते हैं।

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