June 29, 2017 7:41 pm

पहली हिमाचली अलबम का श्रेय मुझे मिलना ही चाहिए : विक्की

fb_img_1451151069895 नीरू चौली घूमदी वीडियो अलबम से हिमाचली संगीत की दुनियां में तहलका मचाने वाले जुब्बल कोटखाई के गांव जाझपुर में 2फरवरी 1977 को पिता नरेंद्र सिंह चौहान और मात चंद्रकला देवी के घर जन्में विक्की चौहान अब हिमाचल की छ: वीडियो और आठ ऑडियो मार्किट में धूम मचाए हुए हैं। विक्की चौहान ने दो हिमाचली फिल्मों कुंजू चंचलो और नीरू ले गई दिल से अपने अभिनय का जादू भी बिखेरा है। हिमाचल के अलावा विक्की की दो उत्तराखंड की अलबमें भी आई है। व्यावसायिक तौर पर बुरे दौर से गुजऱ रही हिमाचल की संगीत इंडस्ट्री में हाल ही में विक्की चौहान ने रंगोली जैसी मंहगे बजट की वीडियो अलबम में काम करके सबको हैरत में डाल दिया है। पेश है विक्की चौहान की हमारे शिमला संवाददाता एस. आर. वर्मा के साथ हुई बातचीत के कुछ अंश।

हिमाचल की पहली वीडियो अलबम से आप भी जुड़ें हैं। इन वर्षों में आपने क्या बदलाव देखे?

नीरू चौली घूमदी हिमाचल की पहली वीडियो अलबम है। मुझे खुशी है कि इसमें मेरे गीत भी शामिल किए गए थे। रही बदलाव की बात तो इस अवधि में वरिष्ठ कलाकारों के कार्यों में काफी सुधार है लेकिन अधिकतर नए कलाकारों ने रातों रात स्टार बनने के लिए हिमाचली संक्कृति ये खिलवाड़ किया जिससे हिमाचली अलबमों का न सिर्फ स्तर गिरा बल्कि हिमाचल संगीत की आत्मा को ही मार दिया जो कि हिमाचली संगीत की दुनिया के लिए घातक है।

जब तक हिमाचल में वीडियो अलबमों का दौर नहीं चला था तो गायकों की पहचान गीतों से होती थी लेकिन हिमाचल वीडियो अलबमों के निमार्ण के बाद गायकों के बजाय मॉडलों की पहचान अधिक होने लगी है इसके पीछे क्या कारण रहे?

हिमाचल में आज भी अच्छे गायकों की आवाज ही उनकी पहचान है। उदाहरण के तौर पर कांगड़ा के करनैल राणा, संजीव दीक्षित सुरेश चौहान, कुल्लू के ठाकुरदास राठी, नरेंद्र ठाकुर, व महासुवी में केएल सहगल, कुलदीप शर्मा, मोहन सिंह चौहान व नरेंद्र रंजन ऐसे गायक है जिन पर मॉडल कभी भारी नहीं पड़े। और हां नए गायकों को भले इस कारण उभरने का मौका न मिला हो।

हिमाचली अलबमों से हिमाचल गायब होता जा रहा है। अधिकतर निर्माता निर्देशक व्यावसायिकता के चलते हिमाचली अलबमों में पाश्चत्य संस्कृति को परोस रहे हैं। आपको क्या लगता है कि ऐसा करना उचित होगा?

यह सचमुच चिंतनीय विषय है। मुझे लगता है हर अलबम छह गीतों में से कम से कम चार गीत हमारी हिमाचल संस्कृति पर आधारित होने चाहिए। भले ही नए दर्शकों की पसंद को देखते हुए कुछ गीतों को आधुनिक तरीके फिल्माया जाए लेकिन हिमाचली संस्कृति की आत्मा जिंदा रहनी चाहिए।

आज हिमाचली संगीत भाषाई दायरे से बाहर आ चुका है। यह बदलाव कैसे संभव हुआ?
इसका श्रेय संगीतकार एसडी कश्यप, ज्योति विष्ठ और लोकगायक ठाकुरदास राठी, कुलदीप शर्मा को भी जाता हैं। इन कलाकारों ने भाषाई दायरे से बाहर निकलकर अपने संगीत व गायकी से हिमाचली संगीत को नई दिशा प्रदान की है।

हिमाचल का सबसे अधिक विवादित गीत नीरू चौली घूमदी वर्ष 2003 में मीडिया की सुर्खियों में रहा। इस विवाद की सच्चाई क्या है?

नीरू चौली घूमदी गीत ठाकुरदास राठी की मौलिक रचना है और इसे बाद में मोहन सिंह चौहान ने महासुवी बोली में गाया और उसके बाद इसे मैंने खुद गाकर इसका वीडियो बनाया। मैं इस बात को हिमाचल के विभिन्न मंचों से सार्वजानिक तौर पर भी कह चुका हूं और इतना जरूर कहना चाहूंगा कि इस गीत के वीडियो अलबम से ही मेरी पहचान बनी और इसका श्रेय भी मुझे मिलना चाहिए।

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