December 11, 2017 6:48 pm

यहां जन्म से मरण तक हर आयोजन में होता है लाल चावल का प्रयोग

The Chuhar Valleyदुर्गम चौहार घाटी जहां पर आज भी प्राकृतिक रूप से परंपरागत तरीके से लाल चावल उगाया जाता है. आज के युग में केमीकल खेती ने जहां खाद्य पदार्थों की गुणवता पर सवालिया चिन्ह लगा दिए हैं वहीं प्रदेश में आज भी कुछ दुर्गम क्षेत्रों में परंपरागत खाद्यों पदार्थों की खेती की जा रही है. इसी में शामिल है चौहार घाटी के चौहारटु चावल जो अपने लाल रंग व अपनी औषधीय गुणवत्ता के कारण विशेष महत्व रखते हैं. यह चावल चौहार घाटी के लोगों के जीवन का अंग है. जन्म से लेकर मृत्यु तक अपने परंपरागत अनुष्ठानों में इन चावलों का चावलों का प्रयोग चौहारवासी करते हैं. इन्हीं चावलों को पालमपुर कृषि विश्वविद्यालय पेटेंट करवाने की प्रकिया में जुटा हुआ है जो कि चौहार वासियों की आर्थिकी को मजबूती प्रदान करेगा. कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर में इन चावलों के पेटेंट की प्रक्रिया के प्रथम चरण में प्लांट वैराइटी प्रोटेक्शन एक्ट के अंतर्गत इस किस्म का पंजीकरण करवाने की प्रक्रिया आरंभ की है. हरित क्रांति के दौर में अधिक उत्पादन देने वाली किस्मों की ओर किसानों के रूझान से दूर चौहार घाटी के किसान आज भी लगभग एक हजार हैक्टेयर में लाल चावलों की चौहारटी किस्म उगा रहे हैं. पब्बर नदी के दोनों तटों पर उगाए जाने वाले चावलों की यह किस्म प्रदेश के अन्य चावलों से पूर्णतय भिन्न है. इसकी खास बात यह है कि इसमें रैड परिकारप पाए जाते है, जो शरीर में लोह अयस्कों की पूर्ति करते है. इस चावल के पानी को गर्भवती महिलाओं व बच्चों के लिए अच्छा आहार माना जाता है. कृषि विवि ने इन चावलों के पंजीकरण को लेकर दस्तावेज प्रक्रिया आरंभ कर दी है.

Related posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *