December 11, 2017 6:27 pm

शीतकालीन राजधानी की सैर सुहानी

ये वादियां, ये फिजाएं बुला रही है तुम्हें

dharamshalaaदेशी हो या विदेशी. हर कोई पहाड़ों की खूबसूरती का दीवाना है. यही वजह है कि हिम में आंचल के बसे हिमाचल प्रदेश में हर साल लाखों सैलानी भ्रमण को आते हैं. बर्फ से लकदक ऊंचे-ऊंचे पहाड़. दूर-दूर तक पर्वत श्रृंखलाओं पर फैली बर्फ की चादर. मानों इन्हें सफेद चमकदार चांदी से मढ़ा गया हो. चोटियों पर इन ठंडी फिजाओं में भ्रमण का मौका मिले तो कितना सुखद अहसास होगा. आपको भले ही यह कल्पना लग रही है, लेकिन यह सच है. अगर यकीन नहीं हो रहा है तो इन सर्दियों में चले आइए कांगड़ा घाटी. समृद्ध संस्कृति, पहाड़ों की नैसर्गिक सुंदरता और देवस्थलों के दर्शन के यहां भरपूर मौके हैं. प्रस्तुत है हिमाचल प्रदेश की’शीतकालीन राजधानीÓ के नाम से मशहूर हो चुके धर्मशाला के कुछ रमणीय स्थलों के बारे में पूरी जानकारी देती धर्मशाला से हमारे संवाददाता संजय चौधरी की यह रिपोर्ट :-

150784_396500913726377_1714837415_n

समूचे विश्व में हिमाचल प्रदेश की प्राकृतिक सुंदरता के कसीदे पढ़े जाते हैं. पहाड़ों की इसी सुंदरता का आकर्षण सैलानियों को यहां खींच लाता है. यही वजह है कि प्रदेश में वर्षभर पर्यटकों का सैलाव उमड़ा रहता है. कांगड़ा जिला में ऐसे अनेकों पर्यटक स्थल हैं जो भ्रमणकारियों की आवाजाही से आबाद रहते हैं. सबसे पहले आपको रू-ब-रू करवाते हैं कांगड़ा के खूबसूरत पर्यटक स्थल धर्मशाला से. यहां तिब्बती धर्मगुरू दलाईलामा का मुख्यालय भी है. इसके चलते धर्मशाला पूरे विश्व में प्रसिद्ध हो चुका है. बौद्ध संस्कृति पर शोध करने वाले देशी और विदेशी शोधार्थी यहां आते रहते हैं. तिब्बत की निर्वासित सरकार का मुख्यालय भी यहीं स्थित है. धर्मशाला पर्यटकों के लिए एक अनुभवमय एवं क्रियाशील स्थल है. धौलाधार की पहाडिय़ों के बीच बसा धर्मशाला समुद्रतल से 1250 मीटर की ऊंचाई पर है. धर्मशाला के ऊपरी हिस्से में मैकलोडगंज बसा है. धौलाधार की पहाडिय़ां सालभर बर्फ से सराबोर रहती हैं. मकलोडगंज में तिब्बती मूल के लोगों का बसेरा है. यहां बौद्ध गोंपा के अलावा तिब्बती धर्म की शिक्षा प्रदान करने वाले शिक्षण संस्थान में पुरातन गं्रथ और मैनुस्क्रिप्ट सुरक्षित रूप में सहेजे गए हैं. ईसाई धर्म के प्रतीक के तौर पर पत्थर निर्मित सेंट जॉन का चर्च और बौद्ध संस्कृति के दर्शन करवाती तिब्बती मोनेस्ट्री में भगवान बुद्धा की प्रतिमा भी कम दर्शनीय नहीं है.

धर्मशाला एक नजर में :-

11223538_199472413722434_7104480379279847329_n

त्रियुंड :-यह स्थल धर्मशाला से मात्र 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. त्रियुंड समुद्रतल से 2975 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है. यह स्थल पिकनिक और ट्रैकिंग के लिए काफी प्रसिद्ध हो रहा है.
कुनाल पाथरी :- यह स्थान धर्मशाला के कोतवाली बाजार से सिर्फ 3 किलोमीटर की दूरी पर बसा है. यहां हिमाचली संस्कृति के दर्शन स्वरूप आप स्थानीय देवी-देवताओं के मंदिरों और उनकी निर्माण शैली से रू-ब-रू हो सकते हैं.
चिन्मया तपोवन :- चिन्मया तपोवन धर्मशाला से 10 किलोमीटर दूर है. यह आश्रम धार्मिक पुस्तक ‘गीताÓ के विचारक स्वामी चिन्मयानंद द्वारा बनवाया गया है.
डल झील :- प्रकृति की हसीन नेमत डल झील धर्मशाला से 11 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. यह झील चीड़ के वृक्षों के बीच स्थित है जो सैलानियों का पसंदीदा पिकनिक स्थल बन रहा है. यह ट्रैकरों के लिए भी एक अच्छा बेस कैंप है. यहां सितंबर माह में मेला भी लगता है.
धर्मकोट :- धर्मशाला से 11 किलोमीटर की दूरी पर स्थित धर्मकोट समुद्रतल से 2100 मीटर की ऊंचाई पर बसा है. यहां से कांगड़ा घाटी और धौलाधार की पहाडिय़ों का विहंगम दृश्य देखते ही बनता है.

gaggal-air-port
भागसूनाथ :- भागसूनाथ पर्यटकों के लिए एक अदभुत दर्शनीय स्थल है. मैकलोडगंज से 11 किलोमीटर की दूरी पर भागसूनाथ में बहते झरने सैलानियों को अनूठा आभास कराते हैं.
तत्वानी और मच्छरियाल :- मच्छरियाल के खूबसूरत झरनों को देख लगता है कि प्रकृति ने सारी खूबसूरती यहीं उड़ेल दी हो. मच्छरियाल के रास्ते में ही तत्वानी भी पड़ता है. यह जगह गर्म पानी के चश्मों के लिए जानी जाती है. दोनों स्थलों की दूरी धर्मशाला से 25 किलोमीटर की दूरी पर है.
करेरी :- धर्मशाला से करेरी की दूरी महज 22 किलोमीटर है. यह स्थल समुद्रतल से 1983 मीटर की ऊंचाई पर है. यहां पर चीड़ के वृक्षों की ठंडी फिजाओं के बीच में एक रेस्ट हाऊस भी है. यह ठहराव स्वास्थ्य के लिए उत्तम कहा गया है. खूबसूरत करेरी झील मुख्य स्थल करेरी से 13 किमी है. यह खूबसूरत झील 3250 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है.
चामुंडा मंदिर :- धर्मशाला से चामुंडा मंदिर 15 किलोमीटर दूर है. यह प्रसिद्ध मंदिर धौलाधार की पहाडिय़ों के बीचोंबीच स्थित है. यहां से सैलानी रमणीय स्थलों जैसे धौलाधार की पर्वत श्रृंखलाओं, बनेर खड्ड, पठियार और लाहला के जंगलों का दर्शन कर सकते हैं.
धार्मिक स्थल
त्रिलोकपुर :- यह रमणीय स्थल धर्मशाला से 41 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. यहां के गुफा मंदिर शिव भगवान को समर्पित हैं, जोकि अध्यात्मिक दृष्टिकोण से अति उतम हैं.
मसरूर :- मसरूर में चट्टान वाले मंदिर हैं. यह मंदिर 8वीं शताब्दी वाले अजंता और एलोरा की गुफाओं सरीखे लगते हैं. यह स्थल कांगड़ा के दक्षिण में स्थित हैं और धर्मशाला से 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं.

3
नूरपूर :- नूरपूर का नाम नूरजहां के नाम पर पड़ा है. यहां पर मुगल साम्राज्य का एक पुराना किला है और कृष्ण भगवान का मंदिर भी है. नूरपूर पश्मीना शॉल और हथकरघा उद्योग के लिए मशहूर है. इस स्थल की दूरी धर्मशाला से 66 किलोमीटर है.

dharamshala-1सड़क मार्ग से मुख्य दूरी
धर्मशाला सड़क मार्ग से पहुंचा जा सकता है. इसके अतिरिक्त यहां पहुंचने के लिए नैरोगेज रेलवे स्टेशन 17 मात्र किलोमीटर दूर है और ब्रॉडगेज रेलवे स्टेशन पठानकोट 90 किलोमीटर. हवाई मार्ग से आने वाले सैलानियों की सुविधा के लिए गग्गल (कांगड़ा) में हवाई अड्डा बना हुआ है. यह धर्मशाला से 12 किमी दूर स्थित है. सड़क मार्ग से राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से धर्मशाला की दूरी 514 किलोमीटर है. चंडीगढ़ से धर्मशाला 239 किलोमीटर, कुल्लू से 214 किलोमीटर और शिमला से 332 किलोमीटर व चंबा से 192 किलोमीटर है.

Related posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *