December 11, 2017 6:27 pm

सैंज घाटी के धार्मिक व प्रकृति पर्यटन की अपार संभावना

Shanghar Village

पार्वती हाईडल प्रोजेक्ट व विश्व धरोहर ग्रेट हिमालयन नैशनल पार्क के कारण सूर्खियों में आई सैंज घाटी का विहगम दृश्य सब के मन को मोह लेने वाला हैं। जैसे ही इस पावन धरा पर किसी के कदम पड़ते हैं, रामे-रोम पुलकित हो उठता है। पहली बार यदि कोई व्यक्ति इस घाटी के सौंन्दर्य को निहारता है तो वह उसकी सुन्दरता का बखान किए बिना नही रह सकता। इस घाटी की यदि पर्यटन की दृष्टि से बात की जाए तो यहाँ पर्यटन की अपार संभावना नज़र आती है। घाटी के प्राचीन मंहदर जो पौराणिक दृष्टि से भी काफी प्रसिद्व है। इन मंदिरों को बहुत ही भव्य शैली में निर्मित किया गया हैं। इन मदिरों से जुड़ी कथाएं इनके महत्व को चार चाँद लगा देती है। शैशर में मनुमहाराज का पैगोडा शैंली का प्राचीन मंदिर स्थित है इस मन्दिर की नक्काशी और सुन्दरता देखते ही बनती है। सैंज घाटी वैसे भी देवी देवताओं व ऋषियों की तपोस्थली हैं। अज्ञातवास के दौरान पाडवों ने इस क्षे़त्र को राक्षसों से मुक्त कर लोगों को अभंयदान प्रदान किया था। धारा देहुरा का मंदिर भी पाडवों द्वारा स्थापित हैं और आज यह देश विदेश के पर्यटको के लिए आर्कषण का केन्द्र हैं। सैंज घाटी में देवी-देवताओं, शिव व नाग के अनेक मंहदर हैं।Shangar

प्रमुख देवी देवताओं में गर्गऋषि, लक्ष्मी नारायण , कमला माता, ब्रहमा, पुंडरिक ऋषि, शंगचुल, जगथम, कशुनारायण, लक्ष्मी व दुर्गा माता है जबकि नागों में शेष नाग, श्रीनाग, बासुकी नाग, करथानाग, ब्रंगूनाग, आदि प्रमुख है। शांघड़ में शंगचूल ऋषि का मंदिर भी अत्यंत सुन्दर स्थान हैं, जहाँ की सुन्दरता देखते ही बनती हैं, चारों ओर वृक्षों की कतारे हैं जो आपस में बात करती वखान दिखाई पडती हैं। धाऊगी में संब के बागान और पेड़ कतार में खडे़ यहाँ की सुषमा को अभिव्यक्त करते हैं। बनाऊगी का कशु नारायण मंदिर पवित्र भूमि होने के साथ-साथ प्राकृतिक सौर्दर्य को आत्मसात किए हुए है। मंदिर के पास सच-झुठ और पाप -पुण्य का परदाफाश होता हैं। रोट क्षेत्र में महर्षि गर्गाचार्म का भव्य मंदिर और वाड़ाथाच, वीठूकंढा, खनियारगी, कंढीगलू, भलाण आदि अनुदय पर्यटक स्थलों में पर्यटन की अपार संभावनाए हैं। प्राकृतिक सौन्दर्य से लवरेज विश्व धरोहर ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क में अनेक प्रकार की रंग बिरंगी जड़ी बूटियां वखन ही हमारा मन होह लेती है। घाटी में स्थित नेशनल पार्क में पर्यटका को प्रकृति का भरपूर आनंद उठाने का अभार आनंद मिलता हैं। वही पार्क में 1500 मीटर सें 6000 मीटर से अधिक ऊँचाई तक इको ट्रैक की पहचान की गई है।जिनमें पैदल भ्रमण करना अपने आप में एक अनुठा अनुभव है। रात्रि ठहराव के लिए पार्क में वन विभग के विश्राम गृह और टैन्ट स्थल है। घाटी में स्थित इस नैशनल पार्क में राल्य पक्षी जुजुराणा, मोनाल , कस्तुरीमृग, बर्फानी चीता , लाल व भूरा भालू, ऐमु वन्य प्राणीयों के सैकड़ों प्रकार की जड़ी बूटियां पाई जाती हैं।

Shanshar
इसके अलावा यहांँ प्रकृति लोगों में संचार करती दिखाई देती हैं। खंतों व बगीचों की हरी -भरी फसलें आँखों में चमत्कार पैदा कर देती हैं। सदाबहार पेंड़ हिलतें हुए मन में एक छाप छोड़तें हैं। सेब, पलम, अनार आदि फलदार पौंधों के बगीचें हैं जो क्षेत्र कें सौर्दर्य के साथ-2 खुशहाली के परिचालक हैं।घाटी में अनेक मनोहर दृश्य तथा खुबसूरत हैं। बनोगी देहुरी का प्राकृतिक सौन्दर्य भाव-विभोर कर देता है।इसके चारों ओर घने देवदार के वृक्ष है।जहाँ प्रकृति को देखकर भाव पल्ल्वन ही नही हेता, ब्लिक तन को भी सकुन व शान्ति मिलती है। प्रकाची, खडाधार, होमखणी, बूंगाा, थीणी, शोचाधार आादि ऊँची पर्वत श्रृखलाओं पर बिछी बर्फ की सुफेद चादर सैंज की शोभा को मुकुट पहनाती नज़र आती है। देवभूमि सैज एक आध्याविक क्षेत्र है। यहाँ के लोगों का व्यव्साय कृषि है। जिला स्तरीय सैंज मेला वर्ष 4से 7 मई तक मनाया जाता है। चार दिनों तक मेले में लोगों व व्यापारियों की भरी भीड़ होती है।
सैंज घाटी के विभिन्न प्रसिद्व देवालय व पर्यटन की अपार संभावनाओं को देखते हुए इसे और अधिक विकसित किया जा सकता है। इसके लिए समस्त सैंज वासियों व प्रदेश सरकार के सहयोग की अपेक्षा है।
लेखक:- बाल कृष्ण शर्मा, पत्रकार

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