October 24, 2017 9:49 am

हिमाचल में किसानों के उग्र आंदोलन का संकेत

हिमाचल प्रदेश, शिमला: प्रदेश सरकार के असहयोगात्मक रवैये से दुःखी हिमाचल प्रदेश के किसानों और बागवानों ने हिमाचल सचिवालय का घेराव किया। गत मंगलवार को सूबे की राजधानी शिमला के सचिवालय के बाहर सैंकड़ों माकपा से संबधित किसानों और बागवानों ने प्रदेश के किसानों की बेदखली रोकने, जंगली-जानवरों और आवारा पशुओं के बढ़ते कहर पर अंकुश लगाने की मांग की। किसान सभा व सेब उत्पादक संघ के संयुक्त तत्वाधान में इस अवसर पर सचिवालय का घेराव किया। किसानों और बागबानों का यह शांतिपूर्वक घेराव चैबीस घंटों तक जारी रहा।
इस अवसर पर किसान सभा के प्रदेशाध्यक्ष डा. कुलदीप सिंह तंवर ने किसानों और बागवानों को संबोधित करते हुए कहा छोटे और गरीब किसानों की 10 बीघा तक सरकारी भूमि को नियमित करने के लिए विधानसभा में पारित संकल्प प्रस्ताव को लागू करने की मांग कर रहे हैं। बार-बार सरकार के ध्यान में लाने के बावजूद सरकार किसानों की समस्याओं को अनसुना कर बेकद्री कर रही है। 27 जुलाई को कोर्ट ने सेब के पेड़ों को काटने के आदेशों को बदल कर उन्हें पू्रन करने के लिए कहा था तो कांग्रेस सरकार और उसके प्रशासनिक तंत्र ने पेड़ों पर आरी चलाकर 30 हजार से भी ज्यादा पेड़ों को क्यों काटा गया यह यक्ष प्रश्न है।

ये है मुख्य मांगेः-
1. सेब और अन्य फलदार पेड़ों को काटना बंद करें।
2. कियानों के बिजली व पानी के कनेक्शनों को काटना बंद करें।
3. सरकार विधानसभा में पारित ‘संकल्प प्रस्ताव’ के तहत किसानों और बागवानों के हित में ठोस निति बनाएं।
4. वन व सरकारी जमीन पर बने लोगों के मकानों (रिहायशी, गोशालाएं, खोखे, ढारे) को तोड़ना बंद किया जाए।
5. ‘अनुसुचित जनजाति और अन्य परंपरागत वन निवासी अधिनियम 2005-06’ के तहत अधिकारों और प्रावधानों को जल्द लागू किया जाए।

Repornarendert :- Narender Sharma

Shimla/ Himachal Pradesh/

India

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