October 24, 2017 9:45 am

बंजार को बहुत याद आएंगे कर्ण

Karanहिमाचल प्रदेश सरकार में केबिनेट मंत्री कर्ण सिंह का यूं जाना गमगीन कर गया है. विकास के मामले में कर्ण सिंह के विरोधी भी उनका लोहा मानते थे. तीन बार बंजार का प्रतिनिधित्व कर चुके कर्ण सिह दो बार मंत्री रहे. बंजार के हित की लड़ाई लड़ते हुए उन्हें अपने अग्रज महेश्वर सिंह से भी दो चार होना पड़ा. बंजार की जनता ने भी कुल्लू राजघराने के इस राजकुमार को सर आँखों पर रखा था. बंजार विधानसभा क्षेत्र से दस हज़ार वोटों से जीत कर विधानसभा पहुंचे कर्ण सिंह ने कांग्रेस का लंबे समय से चला आ रहा सूखा समाप्त कर दिया था और मंत्री पद हासिल कर विकास की लौ जलाई। कर्ण सिंह एक नेकदिल, मिलनसार, जुझारू एवं स्पष्टवादी नेता के रूप में हमेशा याद किए जाएंगे.

पारिवारिक जीवन

करणकर्ण सिंह का जन्म कुल्लू के सुल्तानपुर स्थित रूपी पैलेस में 14 अगस्त 1957 को राजा महेंद्र सिंह के घर में हुआ। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा कुल्लू में पूरी की और पुणे में राजनीति शास्त्र बीए ऑनर्स की शिक्षा प्राप्त की। बीए ऑनर्स की शिक्षा ग्रहण करने के बाद कर्ण सिंह ने प्रबंधन क्षेत्र में कई प्रकार की परीक्षाएं पास की और मुंबई, चंडीगढ़, ग्वालियर में प्रबंधन क्षेत्र में नौकरी की जहां उन्हें बेस्ट मेनेंजमेंट तथा शिक्षा के क्षेत्र में बेस्ट रिर्सचर का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। कर्ण सिंह ने राजनीति में आने से पहले रानी शिवानी सिंह से शादी की जो एक कुशल गृहणी व मार्गदर्शक के रूप में उनके साथ रह रही है।

राजनितिक जीवन

करणकुल्लू के राजा महेंद्र सिंह के बड़े पुत्र महेश्वर सिंह की आशीर्वाद से कर्ण सिहं का बंजार की राजनीती में पदार्पण हुआ, वे राजनीति में 1990 में आए और कर्ण सिंह 1990 से लेकर 1993 तक बंजार से भाजपा के विधायक रहे लेकिन 1993 में उन्हें पूर्व बागवानी मंत्री सत्य प्रकाश ठाकुर से चुनाव हारे। 1998 में कर्ण सिंह ने सत्य प्रकाश ठाकुर को एक बार फिर हराकर चुनाव जीते और प्राथमिक शिक्षा राज्य मंत्री के रूप में प्रदेश में शिक्षा का प्रसार किया। वर्ष 2003 में उन्हें भाजपा की गुटबाजी का शिकार होना पड़ा और बंजार से उनका टिकट काटकर कुल्लू से चुनाव लड़ा दिया गया जहां उन्हें कांग्रेस के प्रत्याशी स्वर्गीय पूर्व मंत्री राजकृष्ण गौड से हार का सामना करना पड़ा। भाजपा की गुटबाजी के चलते कर्ण सिंह ने भाजपा को अलविदा कहकर 2007 में बसपा के टिकट पर बंजार से चुनाव लड़ा और तीसरे नंबर पर रहे। वर्ष 2009 में लोकसभा के चुनावों में कर्ण सिंह ने मंडी संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे वीरभद्र सिंह के कवरिंग कैंडिडेट के रूप में काम किया। हाल ही में संपन्न चुनावों में कर्ण सिंह ने प्रदेश भाजपा सरकार के वन मंत्री खीमी राम शर्मा को नौ हजार दो सौ 92 मतों से पराजित कर रिकॉर्ड कायम किया और बंजार की जनता को कर्ण सिंह के रूप में अढ़ाई वर्षों के बाद मंत्री पद मिला।

बेटे की मौत ने तोड़ कर रख दिया था कर्ण सिंह ने

karan-singh-kulluकर्ण सिंह के ज्येष्ठ पुत्र अभिषेक सिहं की एक सड़क दुर्घटना में मौत हो जाने से उन्हें पूरी तरह से तोड़ कर रख दिया था. कर्ण सिह जिंदादिल इन्सान थे, लेकिन इस बेटे की मौत के लम्बे समय तक वे बुझे बुझे से रहने लगे और शारीरिक तौर पर भी बहुत कमजोर हुए. हालांकि उनकी धरमपत्नी शिवानी सिंह और बेटे आदित्य सिंह ने उन्हें बहुत संभाला.

करणइन विकास कार्यों के लिए हमेशा याद किए जाएँगे कुल्लू के राजकुमार 

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