June 29, 2017 7:47 pm

वायु सुरक्षा पर आधारित रूस की अभिनव मिसाइल प्रणाली एस-500 : यूरी बोरिसोव

एस-500 से भयभीत हो उठा अमरीका

वायु सुरक्षा पर आधारित रूस की अभिनव मिसाइल प्रणाली एस-500 से अमेरिकी सेना पूरी तरह से भयभीत हो उठी है। इस मिसाइल के आगे अमेरिका पूरी तरह असमर्थ हो जाएगा। वास्तव में, रूस इस एस 500 की शक्ति का अमेरिका के पास कोई भी विकल्प नहीं है, और यह अमेरिकी रक्षा अधिकारियों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। अमेरिका के अदृश्य लड़ाकू विमान भी रूस के इस लड़ाकू विमान काबू पर पाने के लिए कारगर नहीं हो सकते।

क्या है एस-500

उप रक्षा मंत्री यूरी बोरिसोव  ने कहा एस-500 लंबी दूरी तक मार करने वाली एक ऐसी मिसाइल प्रणाली है, जो ऊपर आकाश में ही शत्रु के मिसाइल को धवस्त कर देती है। यह नई आधुनिकतम अभिनव मिसाइल प्रणाली रूस की एस-400 ’त्रिऊम्फ’ से कहीं बेहतर होगी, जो मौजूदा समय में रूसी सेना में तैनात है । लगभग 400 किलोमीटर के दायरे के अंदर आकाश से होने वाले किसी भी हमले से बचाव करने वाली इस वायु सुरक्षा मिसाइल प्रणाली को रूस ने सीरिया में भी प्रयोग किया था और अपने वायुसैनिक अड्डे के चारों ओर 400 किलोमीटर का इलाका सुरक्षित बना दिया था। एस-500 प्रणाली में लगे मिसाइल एक साथ दुश्मन के 10 सुपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइलों को ढूँढ़कर 7 किलोमीटर प्रति सैकण्ड की गति से उड़कर उन्हें नष्ट कर देंगे। इस प्रणाली के मिसाइल दुश्मन द्वारा छोड़े गए दस सुपरसोनिक बैलिस्टिक रॉकेटों को एक साथ ढूँढ़कर आकाश में या अन्तरिक्ष में ही उन्हें नष्ट करने की क्षमता है।

क्या है खासियत

वायु रक्षा मिसाइल एस-500 ई सुपर रेडियो संचार प्रणाली से लैस है जिस कारण दुश्मन के सैनिक रूसी सैनिकों की आपसी बातचीत नहीं सुन पाऐंगे। अभिनव मिसाइल प्रणाली एस-500 यूरोप में वायु रक्षा प्रणाली को भी मजबूत करेगा और वायु सुरक्षा मिसाइल प्रणाली एस-400 से भी बेहतर साबित होगी, जो मौजूदा समय में रूसी सेना में तैनात है। लंबी दूरी तक मार करने वाली नवीनतम वायु सुरक्षा मिसाइल प्रणाली एस-500 एक ऐसी नई रेडियो संचार व्यवस्था से लैस होगी, जिसका दुनिया में फिलहाल कोई विकल्प नहीं है। इस रेडियो संचार प्रणाली को तीसरे पक्ष के द्वारा सुनना संभव नहीं है और यह लम्बी दूरियों पर भी एकदम स्पष्ट सन्देश पहुँचाती है। इस नई तकनीक पर आधारित रेडियो संचार प्रणाली से पुरानी वायु रक्षा मिसाइल प्रणालियों को भी लैस किया जा सकेगा। वायु सुरक्षा मिसाइल प्रणाली एस-500 उनमें से एक है, जिनमें इस नई रेडियो संचार व्यवस्था का इस्तेमाल किया जाएगा।

 

सूचना की गोपनीयता को बनाए रखेगी नई तकनीक

रेडियो स्टेशन पूर्व फ्रीक्वैंसी पर आधारित थे, जिस वजह से उन्हें सुनना सम्भव था और उन पर दी जाने वाली सूचनाओं को दुश्मन भी सुन सकता है, लेकिन इस नई रेडियो संचार प्रणाली में ऐसा करना कतई सम्भव नहीं होगा। रूसी उप रक्षा मंत्री बोरिसोव के मुताबिक इन मिसाइलों में लगे उपकरणों की खासियत है कि ये गोपनीयता को बनाए रखते हैं और यह पूरी तरह रूकावट रोधी है। रूकावट रोधी होने का मतलब किसी भी हालत में, किसी भी परिस्थिति में, दुश्मन द्वारा पैदा की गई किसी भी बाधा और उसके द्वारा डाले गए किसी भी बाधा की स्थिति में काम करने की क्षमता होना है। दुश्मन द्वारा रेडियो सूचनाएं या टेलिकोड के प्रसारण की रेंज में कोई भी हस्तक्षेप क्यों न किया जाए, उस हस्तक्षेप का प्रणाली पर कोई असर नहीं होगा। इस प्रणाली में कमान केन्द्र एक स्थान पर बना होता है, मिसाइल दस्ता दूसरे स्थान पर तैनात होता है, जबकि मिसाइल तोप यानि लाँचर तीसरे स्थान पर होता है। ऐसी स्थिति में सही सूचना का आदान-प्रदान करना बड़ा महत्वपूर्ण है। इसके लिए इस तरह के मोबाइल संकेत के लिए एण्टेना का इस्तेमाल किया जाता है, जो इस काम को बखूबी अंजाम देते हैं।   

 

2020 तक सैन्य बेड़े में शामिल होगा एस-500

रूस के सैन्य उद्योग समिति की विशेषज्ञ परिषद के सदस्य वीक्तर मुरखोवस्की और बोरिसोव  ने बताया कि योजना के अनुसार सन् 2020 तक एस-500 को राजकीय प्रमाणपत्र मिल जाएगा और उसके बाद उसे सेना में शामिल किया जाएगा।

 

एस-500 से अमेरिका की चिंता

अमरीकी रक्षा उद्योग के एक प्रतिनिधि ने अपनी टिप्पणी में कहा है कि सोवियत संघ के पतन के बाद भारी नुकसान उठाने वाले रूसी रक्षा उद्योग को पता नहीं कैसे पतन से बचने और आधुनिकतम मिसाइल प्रतिरक्षा प्रणाली की दिशा में आगे विकास करने का अवसर मिला। वास्तव में यह रूसी हथियार बेहद शक्तिशाली हैं। अमरीकी रक्षा उद्योग के प्रतिनिधि ने माना कि अमरीका के अदृश्य लड़ाकू विमान एफ-22 और एफ-35 भी रूस की वायु-सुरक्षा प्रणाली एस-500 के सामने नाकाम सिद्ध होंगे और अमरीकी सैन्य अधिकारी इस बात को लेकर चिन्तित भी हैं।

 

एस-500 का इंडिया क्नेकशन

आधुनिकतम अभिनव मिसाइल प्रणाली एस-500 विकसित करने के उपरांत रूस भारत को वायु सुरक्षा मिसाइल प्रणाली एस-400 देने को तैयार है जबकि इससे पूर्व रूस द्वारा इस तरह की सैन्य सहायता देने के संकेत नहीं थे।

Repornarendert :- Narender Sharma

Shimla/ Himachal Pradesh/

India

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